ऐतरेय ब्राह्मण का बहुश्रुत मन्त्र है चरैवेति...चरैवेति. जो सभ्यताएं चलती रही उन्होंने विकास किया, जो बैठी रहीं वे वहीँ रुक गयी. जल यदि बहता नहीं है, एक ही स्थान पर ठहर जाता है तो सड़ांध मारने लगता है. इसीलिये भगवान बुद्ध ने भी अपने शिष्यों से कहा चरत भिख्वे चरत...सूरज रोज़ उगता है, अस्त होता है फिर से उदय होने के लिए. हर नयी भोर जीवन के उजास का सन्देश है.
...तो आइये, हम भी चलें...
Friday, July 6, 2012
कलारूप शिव
राजस्थान पत्रिका समूह के "डेली न्यूज़"" में प्रति शुक्रवार प्रकाशित होता है यह स्तम्भ "कलातट"". इस बार शिव के कला रूप पर ... आप भी करें आस्वाद.
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