ऐतरेय ब्राह्मण का बहुश्रुत मन्त्र है चरैवेति...चरैवेति. जो सभ्यताएं चलती रही उन्होंने विकास किया, जो बैठी रहीं वे वहीँ रुक गयी. जल यदि बहता नहीं है, एक ही स्थान पर ठहर जाता है तो सड़ांध मारने लगता है. इसीलिये भगवान बुद्ध ने भी अपने शिष्यों से कहा चरत भिख्वे चरत...सूरज रोज़ उगता है, अस्त होता है फिर से उदय होने के लिए. हर नयी भोर जीवन के उजास का सन्देश है.

...तो आइये, हम भी चलें...

Monday, June 22, 2026

सुगठित भावों की गगरी सा गान

 ओंकारनाथ ठाकुर का गान सुगठित भावों की गगरी सा है। शब्दों संग स्वरों के उतार-चढ़ाव की उनकी शैली मन को मथती है। सुनते समय और उसके बाद भी। राग भैरवी में मीरा का भजन 'जोगी मत जा' सुनें। शब्दों में निहित भाव जैसे संगीत में रूपान्तरित हो गए हैं। स्वरों की विरल पुकार यहां है। इसमें उभरता और सदा के लिए मन में बसा रह जाता है-स्वरोच्चार, 'जोगी'! ऐसे ही मालकोंस में 'पग घूंघरू बांध मीरा' को सुनेंगे तो एकबारगी लगेगा सहज—स्वरों में सरलतम रूप में उन्होंने इसे साधा है। पर, उनके गान की स्वर—छटाओं में रमेंगे तो यह भी लगेगा, राग को दार्शनिक गहराई में उतारते वह अद्भुत सम्मोहन से हमें बांध रहे हैं। और यही क्यों? कोमल ऋषभ आसावरी में विलंबित और द्रुत ताल में उनका गान जैसे अमृत की बरखा करता है। ध्रुपद अंग को गले में बिठाते वह स्वरों का जैसे वशीकरण मंत्र पढ़ते हैं। विश्वास नहीं हो तो, राग भीमपलासी में विलंबित एकताल ही सुनें। स्वर दर स्वर और उसका अनुकीर्तन करता एम.एस. गोपालकृष्ण का वायलीन माधुर्य! उनका आलाप सुहाता है तो रागो का निभाव अंतर्मन आलोक से भरता है। मालकोंस में उन्हें सुनेंगे तो लगेगा जीवन—उजास मिल रहा है। भैरवी सुनेंगे तो पाएंगे स्वर—सम्मोहन की किसी डोर से हम बंध रहे हैं। हरेक राग में वह उसके भीतर के रस का मर्म समझाते हैं। आत्म से साक्षात् कराता उनका कंठ जीवन—धन ही तो है! मुझे यह भी लगता है, वह राग से रंजन नहीं करते बल्कि समाधिस्थ चित्त मे ले जाने की क्षमता रखते थे। यह था तभी तो इटली के तानाशाह मुसोलिनी उनका गान सुनकर रो पड़े थे। जगदीशचन्द्र बसु ने स्वीकारा कि पेड़-पौधे उनके संगीत से झुमते हैं। महात्मा गांधी को भी कहना पड़ा था कि उनके एक ही गान में वह जितना हासिल कर सकते हैं, उतना वह बहुत सारे भाषणों से प्राप्त नहीं कर सकते। सूरत के लोगों का यह मानना था कि उनका गान उन्हें अकाल से बचा सकता है। मुझे लगता है, जीते-जी किंवदंती बनने वाले वह महान गायक थे।...



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