ऐतरेय ब्राह्मण का बहुश्रुत मन्त्र है चरैवेति...चरैवेति. जो सभ्यताएं चलती रही उन्होंने विकास किया, जो बैठी रहीं वे वहीँ रुक गयी. जल यदि बहता नहीं है, एक ही स्थान पर ठहर जाता है तो सड़ांध मारने लगता है. इसीलिये भगवान बुद्ध ने भी अपने शिष्यों से कहा चरत भिख्वे चरत...सूरज रोज़ उगता है, अस्त होता है फिर से उदय होने के लिए. हर नयी भोर जीवन के उजास का सन्देश है.

...तो आइये, हम भी चलें...

Saturday, May 9, 2026

भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला में व्याख्यान

 Indian Institute of Advanced Study भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान, शिमला में 27 और 28 अप्रैल 2026 को व्याख्यान देने जाना हुआ। संस्कृति के सरोकारों में 'विकसित भारत' की संकल्पना पर अपनी बात रखते हुए इस बात पर ही जोर दिया कि वही विकास दीर्घकाल तक बना रह सकता है और सार्थक है, जिसमें सांस्कृतिक मूल्य और परम्पराओं का उजास बचाए रखने का जतन हो। कृत्रिम बुद्धिमता से विचार—संस्कृति पर मंडरा रहे खतरों के साथ विकास मे मानवीय मूल्यों की अनदेखी से उत्पन्न संकट, संभावित जटिलताओं पर भी अपनी समझ साझा की...








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