महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय, अजमेर में 'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' पर राष्ट्रीय संगोष्ठी में बीज वक्तव्य देने जाना हुआ। राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी जी के सान्निध्य में कुलगुरु प्रो. सुरेश अग्रवाल जी ने आयोजन की महती पहल की।
संगोष्ठी में अपनी बात रखते हुए कहा, 'विभाजन से भारत की भौगोलिक सीमा से बाहर रह गए हड़प्पा, मोहनजोदड़ो, शारदा पीठ, प्रह्लादपुरी मंदिर, सूर्य मंदिर, हिंगलाज माता मंदिर, कपासराज मंदिर और वरुण देव मंदिर सहित अन्य ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक स्थलों की जो क्षति हुई, उसकी भरपाई कभी हो नहीं सकती। असल में पाक अधिकृत कश्मीर में शारदा पीठ के भारत में नहीं होने का बड़ा नुकसान यह भी हुआ है कि हमने नालंदा और तक्षशिला से भी महत्वपूर्ण ज्ञान-परंपरा के महत्वपूर्ण केंद्र के अतीत को बिसरा दिया। विभाजन की विभिषिका बेकसूर लोगों की हत्या, करोड़ों लोगों के अपने घर, जमीन और अपनों को छोड़ने की व्यथा—कथा ही नहीं है, यह हमारी संस्कृति से जुड़ी विरासत से भी सदा—सदा के लिए अलग होना है। विभाजन अपनी जड़ों, इतिहास और सांस्कृतिक निरंतरता को खो देने की भी बड़ी क्षति है। संस्कृति की शक्ति उसकी निरंतरता के साथ परंपराओं की श्रेष्ठताओं को पहचानते हुए उनके संग भविष्य की दृष्टि का विकास करना भी है।...'
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