ऐतरेय ब्राह्मण का बहुश्रुत मन्त्र है चरैवेति...चरैवेति. जो सभ्यताएं चलती रही उन्होंने विकास किया, जो बैठी रहीं वे वहीँ रुक गयी. जल यदि बहता नहीं है, एक ही स्थान पर ठहर जाता है तो सड़ांध मारने लगता है. इसीलिये भगवान बुद्ध ने भी अपने शिष्यों से कहा चरत भिख्वे चरत...सूरज रोज़ उगता है, अस्त होता है फिर से उदय होने के लिए. हर नयी भोर जीवन के उजास का सन्देश है.

...तो आइये, हम भी चलें...

Sunday, March 29, 2026

टाइमलेस इन ब्रोंज

 बिहार संग्रहालय में इस समय 'टाइमलेस इन ब्रोंज' माने कांस्य में कालजयी शीर्षक के अंतर्गत देश के प्रतिनिधि मूतिकारों की प्रदर्शनी लगी हुई है। इस प्रदर्शनी के आलोक में बोलने जाना हुआ। सुखद था, अपने व्याख्यान के बाद संग्रहालय में ही आउटलुक की संपादक चिंकी सिन्हा से हुए एक संवाद में  मूर्तिकला की आधुनिकी पर भी महती विमर्श का भागीदार बना।...

















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