ऐतरेय ब्राह्मण का बहुश्रुत मन्त्र है चरैवेति...चरैवेति. जो सभ्यताएं चलती रही उन्होंने विकास किया, जो बैठी रहीं वे वहीँ रुक गयी. जल यदि बहता नहीं है, एक ही स्थान पर ठहर जाता है तो सड़ांध मारने लगता है. इसीलिये भगवान बुद्ध ने भी अपने शिष्यों से कहा चरत भिख्वे चरत...सूरज रोज़ उगता है, अस्त होता है फिर से उदय होने के लिए. हर नयी भोर जीवन के उजास का सन्देश है.

...तो आइये, हम भी चलें...

Thursday, July 30, 2026

‘बाघ संरक्षण—संवाद’

 'जयपुर टाइगर फेस्टिवल' के आमंत्रण पर अन्तरराष्ट्रीय बाघ संरक्षण दिवस, 29 जुलाई 2026 को ‘बाघ संरक्षण—संवाद’ में मानसरोवर स्थित दीप स्मृति ऑडिटोरियम में मुख्य वक्ता के रूप में बोलने जाना हुआ। इस दौरान सुप्रसिद्ध फिल्म संगीतकार—गायक और सीताबाणी वाइल्डलाइफ रिजर्व के संस्थापक अभिषेक रे और सरिस्का टाइगर रिजर्व के पूर्व फील्ड डायरेक्टर सुनयन शर्मा के साथ संवाद का सुयोग सुखद था। बाघ संरक्षण से जुड़ी सोच के साथ ही वन्य जीव अभ्यारण्य प्रबंधन, पारिस्थितिकी संतुलन पर विमर्श की यह महती पहल है...













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